
चीनी पालों के सहारे वैश्विक यात्रा?: यूपीआई का अलीपे से (संभावित) जुड़ाव
इस साल फरवरी में भारतीय पर्यटकों के लिए भारतीय रुपये में वित्तीय लेनदेन को आसान बनाने के लिए चीन के अलीपे+ प्लेटफॉर्म को भारत के यूनिक पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) से जोड़ने की चर्चाओं की खबरें सामने आईं। यदि यह साझेदारी साकार होती है, तो यह दोनों प्लेटफॉर्मों के वैश्विक पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण वृद्धि का संकेत देगी। यह खबर इस बात को भी दर्शाती है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक चीन की चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना और उनसे निपटना कितना जरूरी है।
चीन में अलीपे
अलीपे की वैश्विक शाखा अलीपे+, जिसकी स्थापना 2004 में चीन के अलीबाबा समूह ने की थी, का दावा है कि उसके पास विश्व स्तर पर 1.8 अरब ग्राहक खाते हैं और 100 से अधिक देशों में 15 करोड़ से अधिक व्यापारी हैं। स्थापना के बाद से पिछले दो दशकों में मोबाइल इंटरनेट तकनीक के उदय के साथ चीन में अलीपे का तेजी से विकास हुआ है। खुदरा, भोजन, परिवहन और सरकारी सेवाओं में एकीकृत यह प्लेटफॉर्म, टेनसेंट के ‘वीक्सिन पे’ के साथ लोगों के दैनिक जीवन और व्यवसायों का अभिन्न अंग बन गया है। पिछले दो वर्षों में चीनी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को आसान बनाने के लिए कई उपाय किए हैं, जिसके चलते अलीपे को बहुभाषी समर्थन, विदेशी भुगतान वॉलेट को लिंक करने और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे उपाय अपनाने पड़े हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अलीपे की बढ़ती लोकप्रियता को चीनी पार्टी-राज्य/कम्युनिस्ट सरकार के सख्त नियंत्रण में सुनियोजित और सुगम बनाया गया है। 2021 से शुरू हुए "साझा समृद्धि" अभियान के तहत चीनी फिनटेक फर्मों पर कड़ी नियामक निगरानी रखी गई, जिसके परिणामस्वरूप एंट ग्रुप के व्यवसाय में व्यापक बदलाव हुए। इस पुनर्गठन के बाद कंपनी पर अधिक नियामक निगरानी रखी गई और इसके बोर्ड का पुनर्गठन किया गया एवं इसके संस्थापक जैक मा की हिस्सेदारी काफी कम कर दी गई। अलीपे को ‘स्वयं भुगतान’ और ‘व्यापक उपभोक्ता सेवाओं’ पर केंद्रित अलग-अलग व्यावसायिक समूहों में पुनर्गठित किया गया। इस प्रकार, जहां चीन की केंद्र सरकार बड़े प्रौद्योगिकी संस्थानों पर अपना प्रभाव डालती है ताकि उन्हें राष्ट्रीय लक्ष्यों, जैसे डेटा नियंत्रण, स्थिरता बनाए रखना और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करना, के साथ जोड़ा जा सके, वहीं चीनी स्थानीय सरकारें क्षेत्रीय आर्थिक विकास के उद्देश्य से अलीबाबा जैसे प्लेटफार्मों के साथ अधिक सहयोगात्मक और साधन-आधारित तरीके से जुड़ती हैं।
अलीपे नेटवर्क में यूपीआई को शामिल करना
चीनियों की विदेश यात्रा ने अलीपे के वैश्विक विस्तार को गति प्रदान की है, जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय सेवा प्रदाताओं और पश्चिमी प्लेटफॉर्म-आधारित सेवाओं के साथ साझेदारी और सहयोग स्थापित हुए। अलीपे+ पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में अधिक प्रमुखता से दिखाई देता है। ऐसे में यह आश्चर्य की बात नहीं है कि भारतीयों द्वारा विदेश यात्रा करने वालों की लगातार बढ़ती संख्या ( भारत के वार्षिक पर्यटन स्नैपशॉट के अनुसार 2025 में 3.27 मिलियन तक पहुंचने वाली) ने केंद्र सरकार को यूपीआई को वैश्विक स्तर पर अपनाने को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। डिजिटल इंडिया पहल के प्रमुख स्तंभों में से एक, यूपीआई का उपयोग 504 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता और 65 मिलियन व्यापारी करते हैं, जो देश के डिजिटल खुदरा भुगतानों का 84 प्रतिशत है ।
हालांकि यूपीआई वर्तमान में सात देशों में मौजूद है, फिर भी इसकी वैश्विक स्तर पर परस्पर संचालन क्षमता में कुछ सीमाएँ हैं, जैसे कि उच्च मूल्य के भुगतानों के लिए लेनदेन सीमाएँ, स्थिर इंटरनेट की उपलब्धता, देश-विशिष्ट नियामक एकीकरण की आवश्यकता और अंतिम-मील कनेक्टिविटी की क्षमता। उदाहरण के लिए, हालांकि यह दावा किया जाता है कि श्रीलंका को यूपीआई के वैश्विक मानचित्र में शामिल कर लिया गया है, लेकिन लेखक को हाल ही में अपनी यात्राओं के दौरान कोलंबो सहित किसी भी जगह पर यह सुविधा नहीं मिली। स्थानीय खुदरा विक्रेताओं और पर्यटन से संबंधित विक्रेताओं के पास न तो पर्याप्त जानकारी थी और न ही प्लेटफ़ॉर्म को एकीकृत करने का आत्मविश्वास, जो जमीनी स्तर पर अनुवर्ती कार्रवाई और बारीकियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाता है। इसके विपरीत अलीपे श्रीलंका में अधिक आसानी से उपलब्ध है।
यह उल्लेखनीय है कि अलीपे में भारतीय रुचि एंट समूह द्वारा अगस्त 2025 में लोकप्रिय भारतीय फिनटेक कंपनी पेटीएम से अपनी साझेदारी पूरी तरह समाप्त करने के तुरंत बाद सामने आई है। एंट समूह ने 2015 में पेटीएम में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एक निवेशक के रूप में प्रवेश किया था, लेकिन 2020 के गलवान संकट और चीनी निवेशों की बाद की नियामक जांच ने एंट समूह को पूरी तरह से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया, जिसकी प्रक्रिया 2021 से शुरू हुई। समूह ने ज़ोमैटो और ब्लिंकइट प्लेटफॉर्म की मूल कंपनी एटर्नल में भी अपनी सभी हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच दी।
अज्ञात की यात्रा
हालांकि साझेदारी अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है, फिर भी अलीपे के सहारे यूपीआई की वैश्विक यात्रा से अंतरसंचालनीयता (interoperability), डेटा सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठते हैं। भारत में सख्त नियम हैं कि भुगतान डेटा देश के भीतर ही संग्रहित किया जाना चाहिए, इसलिए सीमा पार भुगतान प्रणालियों को स्थानीय भंडारण और ऑडिटिंग की गारंटी देनी चाहिए। यूपीआई और अलीपे अलग-अलग तरीके से काम करते हैं - यूपीआई के पास कई ऐप्स और वास्तविक समय में बैंक-से-बैंक हस्तांतरण के साथ खुला बुनियादी ढांचा है, जबकि अलीपे का वॉलेट इकोसिस्टम बंद है और विदेशी प्रणालियों तक आसान पहुंच की अनुमति नहीं देता है, जिससे अंतरसंचालनीयता सीमित हो जाती है ।
सीमा पार भुगतान से विदेशी मुद्रा रूपांतरण से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं, जैसे कि रूपांतरण करने वाली संस्था, निपटान के समय में अंतर और दोनों देशों में राष्ट्रीय मुद्रा की सुरक्षा तथा धन शोधन जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए लागू नियामक प्रतिबंधों का अनुपालन। इसके अलावा भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में अंतर्निहित आपसी अविश्वास का दीर्घकालिक प्रभाव इस साझेदारी पर अवश्य ही पड़ेगा। यह एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी, क्योंकि दोनों मंच अपने-अपने देशों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था के अभिन्न अंग हैं और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।
साथ ही यह तथ्य कि यह प्रस्तावित गठजोड़ नई दिल्ली के ‘प्रेस नोट 3’ में संशोधन करने के फैसले के साथ आया है, ताकि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश को आसान बनाया जा सके (2020 का यह निर्णय चीन को लक्षित करके लिया गया माना जाता है) भारत के आर्थिक और डिजिटल परिवर्तन में चीनी पूंजी, प्रौद्योगिकी और पहुंच की अनिवार्यता को दर्शाता है।
This article was originally published in English in The Tribune as part of an arrangement with the Centre of Excellence for Himalayan Studies
Translated by Pavan Chaurasia